नहीं बंद होगी पुरानी विधुत इकाइयाँ-यूपीपीसीएल चेयरमैन 

 यूपी की 15 बिजली इकाइयों को मिल सकता है जीवनदान 

नहीं बंद होगी पुरानी विधुत इकाइयाँ-यूपीपीसीएल चेयरमैन 

फोटो-बंद पड़ा ओबरा अ तापघर   

लखनऊ -यूपीपीसीएल सहित ऊर्जा निगमों के चेयरमैन डॉ आशीष कुमार गोयल ने कहा है कि प्रदेश की सबसे पुरानी 200 मेगावाट वाली इकाइयों को बंद नहीं किया जाएगा। ओबरा दौरे के दौरान 'द पावर टाइम' से वार्ता में उन्होंने बताया कि ओबरा परियोजना में मौजूद देश की सबसे पुरानी 200 मेगावाट वाली इकाइयां अभी अच्छा उत्पादन कर रही हैं।  लिहाजा उन्हें बंद करने की कोई योजना नहीं है। चेयरमैन के बयानों से स्पष्ट है कि इन ऐतिहासिक इकाइयों का जीवन कुछ वर्ष बढ़ सकता है। 

गौरतलब है कि पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी पूर्व आदेश के तहत 25 वर्ष से ज्यादा पुरानी कोयला आधारित इकाइयों को 31 दिसंबर 2022 तक बंद करना था। लेकिन अप्रैल 2021 में आये नए आदेश में यह सीमा 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी गयी थी।अब नई समय सीमा बीतने में मात्र सवा साल रह गया है। ऐसे चेयरमैन की मंशा से ओबरा सहित यूपी के कई परियोजनाओं की 25 वर्ष से ज्यादा पुरानी इकाइयों को जीवनदान मिल सकता है। 

बनी रहेगी कोयला पर निर्भरता 

कोयले के अभूतपूर्व संकट ने भले ही देशव्यापी हलचल पैदा की है,लेकिन बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए फिलहाल कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होना मुश्किल है। कार्बन उत्सर्जन जैसी समस्याओं के बावजूद ग्रिड के स्थायित्व को देखते हुए कोयला आधारित बिजली पर ज्यादा जोर है।बढ़ती बिजली की मांग के साथ सभी घरों तक बिजली पंहुचाने के सरकार के वायदे को देखते हुए केंद्रीय विधुत प्राधिकरण देश में स्थापित क्षमता लगभग 3.49 लाख मेगावाट के सापेक्ष 4.28 लाख मेगावाट से ज्यादा नए उत्पादन बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें भी ज्यादा हिस्सा कोयला आधारित बिजली का ही है। खासकर कोल इंडिया द्वारा अपने उत्पादन में भारी वृद्धि की योजना से भी प्राधिकरण को मदद मिल रही है। 

यूपी की 15 इकाइयों को मिलेगा लाभ 

यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ आशीष कुमार गोयल का तजा ब्यान का काफी लाभ उत्तर प्रदेश की पुरानी इकाइयों को मिलेगा।25 वर्ष से पुरानी इकाइयों को बंद करने की अवधि तीन वर्ष बढ़ाने से उत्तर प्रदेश राज्य विधुत उत्पादन निगम की 15 इकाइयों को राहत मिली है। इनमे अनपरा की 210 मेगावाट की तीन,500 मेगावाट की दो,ओबरा की 200 मेगावाट वाली पांच,परीछा की 210 मेगावाट की दो,250 मेगावाट की दो तथा हरदुआगंज की 110 मेगावाट की एक इकाई शामिल है। 

पर्यावरण सहित कुछ अन्य कारणों से ही पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की सबसे पुरानी 23 इकाइयों को बंद किया जा चुका है।जिसमे ओबरा की 50 मेगावाट की पांच,100 मेगावाट की तीन,पनकी की 32 मेगावाट वाली दो,110 मेगावाट वाली दो,हरदुआगंज की 30 मेगावाट वाली तीन,50 मेगावाट वाली दो,55 मेगावाट वाली दो तथा 60 मेगावाट वाली दो इकाइयां एवं परीछा की 110 मेगावाट वाली इकाइयां शामिल है।इन इकाइयों के बॉयलर का नान रिहीट टाइप का बना होना इनके बंद होने का प्रमुख कारण साबित हुआ।नान रिहीट इकाइयों में कोयले की खपत ज्यादा होती है जिससे प्रदूषण ज्यादा होने के साथ ऊर्जा ह्रास भी ज्यादा होता है।

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