समुद्र के नीचे सोना-चांदी, तांबा-निकल का भंडार! संसद में खुलासा
हिंद महासागर की गहराइयों में मौजूद खनिज संसाधनों की खोज को लेकर भारत ने बड़ा कदम उठाया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (ISA) के साथ भारत के दो समुद्र तल खनिज अन्वेषण अनुबंध हैं।
पहला अनुबंध 2002 में मध्य हिंद महासागर बेसिन में पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स (PMN) के लिए 75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हुआ था, जबकि दूसरा अनुबंध 2016 में दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर रिज में पॉलीमेटेलिक सल्फाइड (PMS) के लिए 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया गया।
क्या है समुद्र तल का खनिज खजाना?
PMN (पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स) – इनमें तांबा, निकल और कोबाल्ट जैसी बहुमूल्य धातुएं पाई जाती हैं।
PMS (पॉलीमेटेलिक सल्फाइड) – इसमें तांबा, जस्ता, सीसा, लोहा, चांदी और सोना शामिल हैं।
अब तक की खोज
मंत्रालय ने 75,000 वर्ग किमी अनुबंध क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण में 366 मिलियन मीट्रिक टन नोड्यूल्स की मौजूदगी का अनुमान लगाया है। इन नोड्यूल्स में औसतन 1.09% तांबा, 1.14% निकल और 0.14% कोबाल्ट पाया गया है। PMS क्षेत्र में सक्रिय और निष्क्रिय सल्फाइड छिद्रों की पहचान की जा रही है।

गहरे समुद्र में खनन की स्थिति
वर्तमान में ISA केवल अन्वेषण चरण की अनुमति देता है। समुद्र तल खनिजों के व्यावसायिक खनन के नियम अभी तक अंतिम रूप में तय नहीं किए गए हैं। इसलिए भारत समेत सभी देश अभी केवल सर्वेक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, तकनीकी विकास और धातु निष्कर्षण की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं।
संसद में जानकारी
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि पीएमएन और पीएमएस अन्वेषण गतिविधियों की विशेषज्ञ समितियां नियमित समीक्षा करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गहरे समुद्र में खनन की अनुमति तब मिलेगी जब ISA इसके लिए नियम अधिसूचित करेगा।