अडानी समूह को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण की मंजूरी

अडानी समूह

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने अडानी समूह की संस्थाओं द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। यह अधिग्रहण, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) और अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (AIDPL) या समूह की अन्य इकाइयों के जरिए, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की 100 प्रतिशत तक की शेयरधारिता खरीदने से संबंधित है।

फिलहाल जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT), इलाहाबाद पीठ के निर्देशों के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है।

अडानी समूह ऊर्जा, संसाधन, लॉजिस्टिक्स, सामग्री और कृषि सहित कई क्षेत्रों में कारोबार करता है। अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड समूह की प्रमुख कंपनी है जबकि अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड रियल एस्टेट कारोबार की होल्डिंग कंपनी है।

दूसरी ओर, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड एक विविध अवसंरचना समूह है, जिसका कारोबार इंजीनियरिंग एवं निर्माण, सीमेंट, बिजली, रियल एस्टेट, उर्वरक, आतिथ्य और खेल जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है।

आयोग का विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।

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जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के उत्थान से पतन तक की कहानी

एक समय देश के सबसे प्रभावशाली इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में गिने जाने वाले जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) की कहानी उत्थान और पतन दोनों का प्रतीक है। 1979 में स्थापित यह समूह इंजीनियरिंग, निर्माण, सीमेंट, बिजली, रियल एस्टेट, उर्वरक और खेल जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय रहा। यमुना एक्सप्रेसवे, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स और बड़े स्टेडियमों के निर्माण जैसे कार्यों से कंपनी ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

2000 और 2010 के दशक में JAL ने तेज़ी से विस्तार किया, लेकिन आक्रामक उधारी और असंतुलित निवेश रणनीति ने कंपनी को कमजोर किया। बढ़ते कर्ज, घटते नकदी प्रवाह और प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को संकट में डाल दिया। नतीजतन, 2017 के बाद से JAL पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों का भारी कर्ज चढ़ गया और अंततः कंपनी दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की प्रक्रिया में पहुंच गई।

आँकड़ों में कहानी

1979 – जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) की स्थापना। शुरुआती दौर में कंपनी निर्माण और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित।

1980-1990 – देशभर में बांध और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स बनाए। जेपी ग्रुप ने कुल 13,200 मेगावाट बिजली परियोजनाओं की योजना पेश की।

2000 – कंपनी ने सीमेंट सेक्टर में प्रवेश किया। क्षमता धीरे-धीरे बढ़कर 2010 तक 30 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) तक पहुंची।

2007-2010 – स्वर्णकाल।

1. यमुना एक्सप्रेसवे (165 किमी, 13,000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट) पूरा किया।

2. नोएडा का जेपी ग्रीन स्पोर्ट्स सिटी और ग्रेटर नोएडा का इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम (20,000+ दर्शक क्षमता) तैयार किया।

3. कुल राजस्व 20,000 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचा।

2012-2016 – विस्तार का बोझ।

कर्ज बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स अटके, खरीदारों और निवेशकों का भरोसा टूटा।

2017- बैंकों और वित्तीय संस्थानों का दबाव। JAL और इसकी सहायक कंपनियों पर कुल कर्ज 75,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। शेयर की कीमतें 90% तक गिर गईं।

2018-2020 – परिसंपत्तियों की बिक्री शुरू। अल्ट्राटेक को 21.2 MTPA सीमेंट बिज़नेस 16,189 करोड़ रुपये में बेचा। कुछ हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और भूमि संपत्तियाँ भी बेची गईं।

2021-2024 – स्थिति नहीं सुधरी। कंपनी NCLT के तहत दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की प्रक्रिया में गई। घाटे का विस्तार जारी रहा।

2025 – पतन का निर्णायक मोड़। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने अडानी समूह द्वारा JAL की 100% हिस्सेदारी अधिग्रहण को मंजूरी दी। कभी 20,000 करोड़+ टर्नओवर और लाखों वर्गमीटर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स वाली कंपनी अब नए स्वामित्व के तहत प्रवेश कर रही है।

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मोदी शासनकाल में अधिग्रहणों से लगातार बढ़ता अडानी समूह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अडानी समूह देश के सबसे आक्रामक और तेजी से बढ़ते कारोबारी समूहों में से एक बनकर उभरा है। ऊर्जा, सीमेंट, मीडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे विविध क्षेत्रों में समूह ने लगातार अधिग्रहण कर अपनी पकड़ मजबूत की है।

पिछले माह ही सरकार की कारोबारी अनुकूल नीतियों और दिवालिया परिसंपत्तियों के पुनरोद्धार पर जोर दिए जाने के बीच, अडानी समूह ने पिछले माह विदर्भ (नागपुर, महाराष्ट्र) स्थित एक महत्वपूर्ण थर्मल पावर प्लांट का अधिग्रहण भी पूरा किया था। 

हालिया प्रमुख अधिग्रहण

अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी लिमिटेड (2022)
अडानी समूह ने लगभग 6.4 अरब डॉलर में स्विस कंपनी होलसिम की हिस्सेदारी खरीदकर भारतीय सीमेंट उद्योग में बड़ा धमाका किया। इस अधिग्रहण के बाद अडानी भारत का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक बन गया।

एनडीटीवी (2022)
मोदी शासनकाल में मीडिया क्षेत्र में कदम रखते हुए अडानी समूह ने न्यू दिल्ली टेलीविज़न लिमिटेड (NDTV) में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल की।

गोकुलेश्वर पावर (2023)
हाइड्रो पावर में पैर जमाने के लिए अडानी समूह ने नेपाल स्थित इस परियोजना में हिस्सेदारी ली। यह अधिग्रहण मोदी सरकार की पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग नीति के अनुरूप भी माना जाता है।

मुंद्रा और अन्य बंदरगाह परियोजनाएं
मोदी शासन में ‘समुद्री भारत’ और लॉजिस्टिक्स सुधारों की रफ्तार के बीच, अडानी पोर्ट्स एंड SEZ लिमिटेड ने देशभर के कई बंदरगाहों का अधिग्रहण व विस्तार किया।

ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स
मोदी सरकार के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को साधने में अडानी समूह ने बड़े पैमाने पर निवेश किया। सोलर और पवन ऊर्जा कंपनियों के अधिग्रहण व साझेदारी कर समूह ने ‘ऊर्जा संक्रमण’ की दिशा में खुद को अग्रणी साबित किया।

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