भारत 2030 तक 6G लॉन्च करने की तैयारी में, वैश्विक स्तर पर बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
दुनिया तेजी से 5G से 6G की ओर बढ़ रही है और भारत ने भी इस दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत 6G तकनीक का वैश्विक अग्रणी बने। इसके लिए विस्तृत रोडमैप और विज़न डॉक्यूमेंट पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
भारत का रोडमैप
मार्च 2023 में जारी भारत 6G विज़न दस्तावेज़ के मुताबिक भारत 2030 तक 6G तकनीक का व्यावसायिक क्रियान्वयन करना चाहता है। 5G से आगे बढ़कर 6G नेटवर्क उच्च गति, अल्ट्रा-लो लेटेंसी, AI-नेटिव नेटवर्क, और वैश्विक स्तर पर निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। इसके लिए देशभर में 100 5G लैब्स, भारत 6G एलायंस, और 275 करोड़ रुपये से अधिक की 104 आरएंडडी परियोजनाएं शुरू की गई हैं। IIIT बैंगलोर का टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (TIH) वर्तमान में Reconfigurable Intelligent Surfaces (RIS) और O-RAN Massive MIMO जैसी तकनीकों पर काम कर रहा है, जो 6G की नींव होंगी।
वैश्विक स्थिति
दक्षिण कोरिया: 2028 तक 6G ट्रायल लॉन्च करने का लक्ष्य।
जापान: 2030 तक व्यावसायिक रूप से 6G उपलब्ध कराने की योजना।
चीन: 6G रिसर्च में सबसे आगे, पहले ही लो-अर्बिट सैटेलाइट्स के जरिए टेस्टिंग शुरू कर चुका है।
अमेरिका और यूरोप: संयुक्त शोध कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं, 2028-29 तक पायलट प्रोजेक्ट्स की तैयारी।
भारत की स्थिति
भारत ने 5G को देर से अपनाया था, लेकिन 6G के मामले में वह वैश्विक मानकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य है कि 6G नेटवर्क भारत में 2029-2030 तक व्यावसायिक रूप से शुरू हो जाएं और भारत तकनीक का उपभोक्ता ही नहीं बल्कि नवाचार और मानक निर्धारण में वैश्विक नेता भी बने।
संसद में जानकारी
राज्यसभा में संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने बताया कि भारत की 6G रणनीति सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सहयोग और मानक निर्धारण में भारत की मजबूत भूमिका सुनिश्चित करेगी।