उत्तर प्रदेश ‘दावेदार’ श्रेणी में, ऊर्जा दक्षता सुधार की बड़ी गुंजाइश

राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक 2024

विद्युत मंत्रालय ने राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक (SEEI) 2024 जारी किया है। इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को ‘दावेदार’ (Contender) श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि राज्य ने ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में कुछ प्रगति तो की है, लेकिन अभी भी सुधार और तेज़ गति से काम करने की आवश्यकता है।

विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक (SEEI) 2024 में राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। अग्रणी (60% से अधिक स्कोर), सफल (50-60%), दावेदार (30-50%) और आकांक्षी (<30%)। अग्रणी श्रेणी में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु शामिल हैं। सफल श्रेणी में असम और केरल को स्थान मिला है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश दावेदार श्रेणी में हैं। वहीं, 30% से कम स्कोर करने वाले राज्य आकांक्षी माने गए हैं। यह वर्गीकरण राज्यों की ऊर्जा दक्षता नीतियों, भवन, उद्योग, परिवहन, कृषि और डिस्कॉम सुधारों पर आधारित है।

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के महानिदेशक आकाश त्रिपाठी ने बताया कि SEEI 2024, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भवन, उद्योग, परिवहन, कृषि, डिस्कॉम और नगरपालिका सेवाओं जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों का आकलन करता है। इस बार 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन किया गया।

उत्तर प्रदेश की स्थिति

उत्तर प्रदेश को हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और ओडिशा के साथ दावेदार श्रेणी (30-50%) में रखा गया है। SEEI 2023 की तुलना में, इस साल अग्रणी राज्यों की संख्या घटकर सात से पाँच रह गई है। इसमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु शामिल हैं। उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन बताता है कि राज्य ने नीति निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन में कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन अभी ऊर्जा दक्षता सुधार की रफ्तार बढ़ाने की ज़रूरत है।

प्रमुख संकेतक

भवन क्षेत्र में 24 राज्यों ने ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC 2017) अधिसूचित की है और 20 राज्यों ने इसे नगरपालिका उप-नियमों में शामिल किया है। उत्तर प्रदेश को इस दिशा में और मजबूती से काम करना होगा। परिवहन क्षेत्र में 31 राज्यों ने विद्युत गतिशीलता नीति लागू की है और 14 राज्यों ने भवनों में ईवी चार्जिंग को अनिवार्य किया है। कृषि क्षेत्र में कई राज्यों ने सौर पंप और शीत भंडारण को बढ़ावा दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश अभी इस मामले में अग्रणी नहीं है। डिस्कॉम सेक्टर में मांग-पक्ष प्रबंधन (DSM) योजनाओं को अपनाने की रफ्तार तेज करनी होगी।

आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश को ऊर्जा दक्षता भवन कोड का सख्ती से पालन, MSME उद्योगों में ऊर्जा ऑडिट, EV चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और कृषि क्षेत्र में सौर पंपों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। इससे न केवल राज्य का प्रदर्शन बेहतर होगा बल्कि ऊर्जा लागत में कमी और पर्यावरणीय लाभ भी मिलेगा।

SEEI 2024 संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के लिए ऊर्जा दक्षता सुधार केवल जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा का भी अहम साधन बन सकता है।

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