आईआईटी बॉम्बे में पेरोव्स्काइट टैंडम सौर सेल में बड़ी उपलब्धि

आईआईटी बॉम्बे स्थित राष्ट्रीय फोटोवोल्टिक अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र

भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को गति देने के लिए केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आज आईआईटी बॉम्बे स्थित राष्ट्रीय फोटोवोल्टिक अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र (NCPRE) का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिकों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों एवं सलाहकार बोर्ड के सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बातचीत की और अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया।

दौरे के दौरान मंत्री श्री जोशी ने 4-टर्मिनल सिलिकॉन/सीडीटीई-पेरोव्स्काइट टैंडम सौर सेल की 29.8% रूपांतरण दक्षता को “राष्ट्रीय उपलब्धि” करार दिया। यह उपलब्धि आईआईटी बॉम्बे द्वारा समर्थित स्टार्टअप एआरटी-पीवी इंडिया ने हासिल की है, जिसे भारत में अब तक का सबसे उन्नत सौर सेल प्रदर्शन माना जा रहा है। उन्होंने इसे भारत के लिए “गेम-चेंजर” करार दिया।

श्री जोशी ने कहा कि "एनसीपीआरई में विकसित यह तकनीक पारंपरिक सौर पैनलों की तुलना में अधिक कुशल, सस्ती और मापनीय (scalable) है। इसमें 30% से अधिक दक्षता प्राप्त करने की क्षमता है, जिससे भारत अगली पीढ़ी के फोटोवोल्टिक में वैश्विक नेता बन सकता है।"

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घरेलू अनुसंधान को मिल रहा है बड़ा प्रोत्साहन

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि एमएनआरई ने अब तक NCPRE को ₹200 करोड़ से अधिक का वित्तीय सहयोग दिया है, साथ ही एआरटी-पीवी इंडिया को ₹83 करोड़ (10 मिलियन डॉलर) की सहायता दी जा रही है ताकि आईआईटी बॉम्बे परिसर में एक पायलट उत्पादन इकाई स्थापित की जा सके। यह कदम घरेलू बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देने और “मेक इन इंडिया” को प्रोत्साहन देने की दिशा में है।

श्री जोशी ने यह भी कहा कि मंत्रालय "अनुसंधान एवं विकास को व्यावसायीकरण से जोड़ने के लिए" समर्पित है, ताकि प्रयोगशालाओं में होने वाला नवाचार सीधे बाजार और उद्योगों तक पहुँचे। उन्होंने आरटीडी, R&D फंडिंग योजनाओं और हाल ही में मंजूर की गई 1.27 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय RDI योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत के नवाचार आधारित भविष्य की नींव है।

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वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत

केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत अब केवल सौर ऊर्जा को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पेरोव्स्काइट सौर सेल, इनवर्टर टेक्नोलॉजी, पीवी-विश्वसनीयता, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा, “एनसीपीआरई का अनुसंधान भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा नवाचार के मानचित्र पर नेतृत्व भी दिलाएगा।”

उद्योग और शिक्षा जगत का संगम

इस कार्यक्रम में आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे, एनसीपीआरई के प्रधान अन्वेषक प्रो. बेलोन जी. फर्नांडीस, तथा एआरटी-पीवी इंडिया के सह-संस्थापक प्रो. दिनेश काबरा उपस्थित रहे। मंत्री ने स्टार्टअप टीम से आग्रह किया कि वे इस तकनीक को व्यावसायिक रूप से साबित करें कि यह न केवल तकनीकी दृष्टि से श्रेष्ठ है बल्कि आर्थिक रूप से भी व्यवहार्य है।

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